यूपी डेयरी निर्यात: ₹489 करोड़ का आंकड़ा पार; 10.16% की वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फूंकी जान

यूपी डेयरी निर्यात: ₹489 करोड़ का आंकड़ा पार; 10.16% की वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फूंकी जान

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0.16% Growth Infuses New Life into Rural Economy

  1. यूपी दुग्ध और पशु-उत्पाद निर्यात 489 करोड़ पार।

  2. 10.16% की रिकॉर्ड वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

  3. योगी सरकार के प्रयासों से गुणवत्ता और कोल्ड चेन सुधरे।

लखनऊ। UP Dairy Exports: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब केवल देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में एक बड़े निर्यातक के रूप में उभर रहा है। पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का असर अब स्पष्ट रूप से आंकड़ों में दिखने लगा है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, डेयरी और पशु-आधारित उत्पादों के निर्यात में पिछले डेढ़ वर्ष में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रदेश की मजबूत होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सीधा प्रमाण है।

निर्यात में 10 प्रतिशत से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि

आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि “डेयरी उत्पाद, अंडे, प्राकृतिक शहद और खाद्य उत्पाद” की श्रेणी में यूपी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के बीच इन उत्पादों का निर्यात जहाँ 444.10 करोड़ रुपये था, वहीं अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के दौरान यह बढ़कर 489.24 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच गया है। इस प्रकार, इस क्षेत्र में 10.16 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर करीब 45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को दर्शाती है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़ी यूपी की धमक

उत्तर प्रदेश के निर्यात को मिली यह नई गति केवल डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दूध, घी, पनीर, मक्खन और मिल्क पाउडर की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ प्राकृतिक शहद और अंडों की सप्लाई चेन को भी सुदृढ़ किया गया है। बेहतर प्रोसेसिंग सुविधाओं, अत्याधुनिक पैकेजिंग और सख्त क्वालिटी कंट्रोल ने यूपी के उत्पादों को विदेशी बाजारों में अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अधिक आकर्षक और भरोसेमंद बना दिया है।

योगी सरकार के विजन से मिली संजीवनी

इस सफलता के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह विजन है, जिसके तहत डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के विस्तार और कोल्ड चेन नेटवर्क को आधुनिक बनाया जा रहा है। सरकार न केवल पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय सहायता के माध्यम से सीधे तौर पर सशक्त भी कर रही है। दुग्ध सहकारी समितियों और निजी डेयरी इकाइयों को दिए जा रहे प्रोत्साहन ने ग्रामीण स्तर पर संग्रहण तंत्र को मजबूत किया है, जिससे वैश्विक मांग को पूरा करना आसान हुआ है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत

डेयरी और संबद्ध उत्पादों के निर्यात में आई यह उछाल उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों और पशुपालकों के लिए समृद्धि का द्वार खोल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। यदि इसी तरह ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया जाता रहा, तो उत्तर प्रदेश भविष्य में पशु-आधारित उत्पादों के वैश्विक निर्यात हब के रूप में अपनी पहचान और अधिक मजबूत कर लेगा।